तुमको कुछ भी ना याद रहा
लम्बी-लम्बी अपनी बातें
जगती सोती छोटी रातें
प्रेम भरी वो कथा कहानी, ना उनमें कुछ स्वाद रहा
तुमको कुछ भी ना याद रहा
नज़रों की वो बोली अपनी
सपनों की वो झोली अपनी
कुछ ना कहकर सबकुछ कहना, अब ना वो उन्माद रहा
तुमको कुछ भी ना याद रहा
प्यार के अपने सारे वादे
कितने सच्चे सीधे-साधे
इस प्रेम के नाते में बस धरती थी, आकाश न था
तुमको कुछ भी ना याद रहा
प्रेम दिया तुमने क्यो इतना
गागर में हो सागर जितना
पहले ही आबाद न था मैं, अब भी यूँ बर्बाद रहा
तुमको कुछ भी ना याद रहा
ना कोई कसम ना कोई वादा
ना वो रिश्ता सीधा सादा
अपना सबकुछ देकर तुमको, मैं भी खाली हाथ रहा
तुमको कुछ भी ना याद रहा
लम्बी-लम्बी अपनी बातें
जगती सोती छोटी रातें
प्रेम भरी वो कथा कहानी, ना उनमें कुछ स्वाद रहा
तुमको कुछ भी ना याद रहा
नज़रों की वो बोली अपनी
सपनों की वो झोली अपनी
कुछ ना कहकर सबकुछ कहना, अब ना वो उन्माद रहा
तुमको कुछ भी ना याद रहा
प्यार के अपने सारे वादे
कितने सच्चे सीधे-साधे
इस प्रेम के नाते में बस धरती थी, आकाश न था
तुमको कुछ भी ना याद रहा
प्रेम दिया तुमने क्यो इतना
गागर में हो सागर जितना
पहले ही आबाद न था मैं, अब भी यूँ बर्बाद रहा
तुमको कुछ भी ना याद रहा
ना कोई कसम ना कोई वादा
ना वो रिश्ता सीधा सादा
अपना सबकुछ देकर तुमको, मैं भी खाली हाथ रहा
तुमको कुछ भी ना याद रहा

2 टिप्पणियां:
n mein a ki matra nahi lagegi. apart from that, a beautiful composition.
woh aisey hi prayog hoga isliye lagaya hai
wo n nahi naa hai
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